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जूते पहनकर नमाज़ पढ़ना: बड़ा अपराध या एक परित्यक्त सुन्नत?

यह एक आम सवाल है कि क्या जूते पहनकर नमाज़ पढ़ना जायज़ है। इस्लामी विद्वानों के अनुसार:

प्रमाण

नबी (ﷺ) ने कभी-कभी अपने जूते पहनकर नमाज़ पढ़ी। सहाबा ने भी ऐसा किया। यह एक सुन्नत है जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है।

शर्तें

  • जूते साफ होने चाहिए
  • जूतों पर नापाकी (गंदगी) नहीं होनी चाहिए
  • मस्जिद के फर्श को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए

आधुनिक अभ्यास

हालांकि यह सुन्नत है, अधिकांश मस्जिदों में कालीन बिछे होने के कारण इसे आमतौर पर नहीं किया जाता। मस्जिद प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष

जूते पहनकर नमाज़ पढ़ना इस्लाम में जायज़ है और यह एक सुन्नत है, लेकिन मस्जिद के नियमों और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। अगर मस्जिद में जूते उतारने का नियम है, तो उसका पालन करना चाहिए।

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